उत्तराखंड ग्लेशियर
ग्लेशियर सदा हिमछादित रहने वाले पर्वत शिखरो में विशाल हिमराशि के रूप में मिलते है ,जो गतिशील होते है अपने भार के वजह से ढालों का अनुसरण करते हुए धीरे-धीरे नीचे की ओर प्रवाहमान होते है ।
* इसके उपनाम – हिमानिया, हिमनद,बर्फ की नदी या बमक कहते है।
21 मार्च को गलेशियर दिवस मनाया जाता है इस दिवस की शुरुवात 2025 से हुई थी
* भारत का सबसे बड़ा हिमनंद कराकोरम श्रेणी में अविस्थत सियाचीन ग्लेशियर है जो 72 किमी० लम्बा है।
* उत्तराखंड में महानहिमालय क्षेत्र में हिमछादित पर्वत शिखर पाये जाते है अत: यह (हिमानी) ग्लेशियर का होना स्वाभाविक है।
* उत्तराखंड राज्य नेहिमनद के संरक्षण के लिए 14 जून 2010 में हिमनद प्राधिकरण बनाने का निर्णय लिया है उत्तराखंड हिमनद प्राधिकरण बनाने वाला विश्व का पहला राज्य होगा इस प्रस्तावित प्राधिकरण का नाम स्नों एंड ग्लेशियरअथॉरिटी रखा गया है राज्य के मुख्यमंत्री इस प्राधिकरण के अध्यक्ष होंगा ।
* उत्तराखंड में ग्लेशियरों में हो रहे बदलाव व ग्लेशियर के दिन प्रतिदिन घटने पर्यावरण से होने वाले नुकसान के चलते उत्तराखंड में समय-समय पर कई संस्थान द्वारा जैसे वाडिया हिमालय भूगर्भ संस्थान व अन्तरिक उपयोग केन्द्र युसैक जो देहरादून में स्थित उसके द्वाराराज्य के ग्लेशियर का अध्ययन सेटलाईट द्वारा किया जा रहा है।
उत्तराखंड के प्रमुख ग्लेशियर
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गंगोत्री ग्लेशियर
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गंगोत्री ग्लेशियर– उत्तरकाशी जनपद में स्थित उत्तराखंड राज्य का सबसे बड़ा ग्लेशियर है, जिसकी लंबाई 30 किलोमीटर तथा 2 से 4 किमी चौड़ा है, गंगोत्री ग्लेशियर कई ग्लेशियर से मिलकर बना है।
जिसमें चतुरंगी ग्लेशियर, कीर्ति ग्लेशियर, रक्तवन ग्लेशियर प्रमुख है,
गंगोत्री गलेशिया के पास गोमुख नामक स्थल से भागीरथी नदी का उदगम होता है भागीरथी राज्य की दूसरी लम्बी नदी है ।
चतुरंगी के सहायक ग्लेश्यिर- सीता, सूरालय, वासुकी
गंगोत्री गलेशियर को 31 मार्च 2017 मई जीवित व्यक्ति का दर्जा दिया गया है I
मिलम ग्लेशियर-पिथौरागढ़ जनपद में मुनस्यारी क्षेत्र में है, यह राज्य का तीसरा बड़ा ग्लेशियर है तथा कुमाऊं का शुद्ध रूप से सबसे बड़ा ग्लेशियर है इसकी लम्बाई 16 किमी है पिंडर की सहायक नदी मिलम व काली की सहायक गौरी गंगा नदी का उद्गम इस ग्लेशियर से होता है।
पिंडारी ग्लेशियर-यह राज्य का दूसरा बड़ा ग्लेशियर है, जो बागेश्वर पिथौरागढ़ चमोली जनपद में फैला हुआ है अलकनंदा की सहायक नदी पिंडर का उद्गम यहीं से होता है पिंडारी ग्लेशियर त्रिशूल नंदा देवी व नंदा कोट शिखरों के मध्य स्थित है।
सतोपंथ व् भागीरथी गलेशियर यह दोनों गलेशियर चमोली जनपद में नीलकंठ पर्वत के पूर्वी भाग में आराम कुर्सी के समान हैं , इसी स्थान को अलकापुरी कहा जाता है I
चोराबाड़ी गलेशियर यह गलेशियर रुद्रप्रयाग जनपद में स्थित है जो 14 किमी लंबा है इस ग्लेशियर से अलकनंदा की सहायक नदी मंदाकनी नदी का उद्गम होता है इस हिमनद के निकट गांधी सरोवर भी है कहा जाता है की इस सरोवर में गांधी जी को अस्थियां प्रवाहित की गयी थी I
बंदरपूछ ग्लेशियर-उत्तरकाशी जनपद में यमुना नदी घाटी पर स्थित है, इसकी लम्बाई 12 किमी है
यमनोत्री ग्लेशियर उत्तरकाशी जनपद में स्थित है। इस ग्लेशियर से यमुना नदी का उद्गम होता है।
खतलिंग गलेशियर यह गलेशियर टिहरी जनपद में स्थित है,
खतलिंग गलेशियर यह टिहरी जनपद में िस्थित है यहां से भिलंगना नदी का उद्गम होता है जो भागीरथी की सबसे लम्बी सहायक नदी है केदारनाथ में वर्णित स्फटिक लिंग सम्भवता यहीं है इसे विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग कहा जाता है I
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उत्तरकाशी के प्रमुख ग्लेशियर
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1-जौधार गलेशियर 2- डोरियानी गलेशियर 3-कीर्ति गलेशियर 4- जांवली गलेशियर 5–मेरु
6-भिर्गुपंथ गलेशियर7-मैणादी गलेशियर, 8-स्वच्छंद गलेशियर 9-गनोहिम गलेशियर 10- चांगथांग ग्लेशियर 11-
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पिथौरागढ़ के प्रमुख ग्लेशियर
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1-नामिक गलेशियर 2-रालम गलेशियर 3-पिनौरा गलेशियर 4–काली गलेशियर 5-बाल्टीगलेशियर6-हीरामणि गलेशियर 7-फिलम 8 सोना 9 बनकटिया गलेशियर 10 मालेवा गलेशियर 11 गोवानखान गनोहिम गलेशियर
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बागेश्वर के प्रमुख ग्लेशियर
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1-कफनी 2- मैकतोलि 3-सुखराम 4-सुंदरढुंगा |
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चमोली के
प्रमुख ग्लेशियर
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1-सतोपंथ 2-भागीरथी 3- बद्रीनाथ 4-दूनागिरी 5-हिपराबकम
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रुद्रप्रयाग- 1- चोराबाडी ग्लेशियर 2- केदारनाथ ग्लेशियर
खतलिंग- टिहरी तथा रुद्रप्रयाग में है, भागीरथी की सबसे बड़ी सहायक नही भिलंगना का उद्गम इसी ग्लेशियर होता है ।
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