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उत्तराखंड के प्रमुख पर्वत चोटी 

 

उत्तराखंड राज्य की अधिकांश हिमच्छादित ऊँची चोटी महान हिमालय में गढ़वाल मण्डल में स्थित है  कुछ प्रमुख चोटीयों का विवरण इस प्रकार है ।  

 
* नंदा देवी  की ऊंचाई 7,817 मी0 चमोली जनपद में स्थित है जो राज्य की सबसे ऊंची चोटी है, अगर बात की जाए नंदादेवी की तो नंदा देवी भारत में हिमालय की दूसरी ऊंची चोटी है विश्व में इसका ऊंचाई के आधार पर  23 वाँ स्थान है । 
 
 
* नन्दा देवी पर्वत पूर्व में ऋषि गंगा  तथा पश्चिम में गोरी गंगा  घाटी के बीच स्थित है, नंदा देवी पर्वत समूह में नंदा देवी पूर्वी , जिसको सुनन्दा पर्वत भी कहा जाता है , दूनागिरी, त्रिशूल, नंदाकोट पर्वत आदि शामिल है । 

एवरेस्ट पर प्रथम बार चढ़ने वाले तेनजिंग नॉर्वे ने नंदा देवी पूर्वी को विश्व की सबसे कठिनतम श्रेणी में शामिल किया है, इसे एवरेस्ट  से कठिन माना है
 
 * नंदा देवी का एक उपनाम किलर माउंट भी है
 
* नंदा देवी राष्ट्र उद्यान नंदा देवी श्रेणी में है, जिसे 1982 नेशनल पार्क  घोषित किया गया 1988 में नंदा देवी राष्ट्र उद्यान को  विश्व धरोहर में शामिल किया गया है 
 
* 1936 नंदा देवी का सफलतम अभियान सर्वप्रथम नोयाल एबर्ट ओडले व टिलमैन द्वारा किया गया था ।
 
* 1964 एन कुमार के नेतृत्व में भारतीय सेना द्वारा इस पर सफल अभियान किया गया ।
 
* 1981 में नंदा देवी पर महिलाओं पर्वतारोही  दल द्वारा प्रथम अभियान चंद्रप्रभा ऐतवाल, रेखा शर्मा, हर्षवंती बिष्ट, इन तीन पर्वतारोही के द्वारा किया गया।
 
नंदा देवी का ऐतिहासिक धार्मिक महत्व
 
* नंदा देवी पर्वत का अपना धार्मिक महत्व है, उत्तराखंड में नंदादेवी को देवी रुप में पूजा जाता है, लोकमान्यता में इसे हिमालय की पुत्री  स्कन्द पुराण में नंदा देवी को वरदायिनी देवी  अधिस्ठात्री देवी के रूप में  वर्णित किया गया जिन्हें माँ पार्वती का रूप मना जाता है  । 

* अगर ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो उत्तराखंड का प्रथम ऐतिहासिक राजवंश कत्यूरी वंश की कुलदेवी नंदा देवी थी और कत्यूरी वंश के बाद  कुमाऊँ में स्थापित चन्द वंश की कुलदेवी भी नंदा देवी है  तथा गढ़वाल के परमार वंश की कुल देवी  माँ  राजराजेश्वरी  है जो माँ नंदा का रूप है  । 
 
* राज्य में प्रत्येक वर्ष छोटी नंदा देवी यात्रा आयोजित की जाति है, जबकि 12 वर्ष बाद बड़ी नंदाराज जात यात्रा आयोजित की जाती है जो विश्व की सर्वाधिक लम्बी धार्मिक पैदल यात्रा है जो नौटी से होमकुंड तक आयोजित की जाती है  ।
कुमाऊं गढ़वाल में माँ  नंदा देवी के सम्मान में मेले,उत्सव आयोजित  में आयोजित किये जाते हैं ।
 
* प्राचीन समय में नंदा देवी को बधापर्वत के नाम से जाना जाता था, प्राचीन समय में यहां केदारखंड यानि( गढ़वाल ) मानस खंड यानि (कुमाऊं) के बीच सीमा निर्धारण नन्दा देवी पर्वत करता था
 
* कामेट पर्वत 
राज्य की दूसरी ऊंची चोटी यह भी चमोली में स्थित है इसकी ऊंचाई 7756 मीटर है  

*कामेट पश्चिमी  धवल गंगा तथा  सरस्वती नदियों के मध्य कामेट पर्वत 3 हिमाच्छदित पर्वतों से घिरा हुआ है,-माणा, मुकुट, अभीगामिनी पर्वत आदि है 
 
 
* नंदा देवी पूर्वी 
 
राज्य की तीसरी सबसे ऊंची चोटी है चमोली में स्थित है इसकी ऊंचाई 7434 मीटर है । 

* इसे सुनन्दा पर्वत के नाम से भी जाना जाता है । 
 
 

चौखम्ब पर्वत – चमोली में स्थित है ऊंचाई 7138 मीटर है 

त्रिशूल पर्वत- चमोली में स्थित है ऊंचाई 7120 मीटर है इसमें त्रिशूल के समान इसमें तीन पर्वत चोटी शामिल है त्रिशूल-1, त्रिशूल-2, त्रिशूल-3, 

*सर्वप्रथम त्रिशूल पर्वत का सफल अभियान टी०जी० लाँगस्टफ व उनके दो सहयोगी द्वारा किया गया  


 

 
 
 चमोली के  प्रमुख पर्वत 
1 दूनागिरी 2-नन्दाकोट 3- नीलकंठ पर्वत 4- हाथी पर्वत 5-पर्वती पर्वत 6-बद्रीनाथ पर्वत 7- माणा पर्वत 8-नर पर्वत 9- नारायण पर्वत, 10-गंधमादन पर्वत, 11-सतोपंथ पर्वत,  12 देवस्थान पर्वत,  13 नन्दाघुघुती, 14- जय पर्वत 15- विजय पर्वत 16 गुन्नी पर्वत 17-मृगथूनी पर्वत ,18-मुकुट पर्वत
 
उत्तरकाशी के पर्वत
1-गंगोत्री, 2-बन्द्र्पुंछ.3-थलिया सागर,4-भृग पंथ पर्वत 5-मेरु पर्वत, 6- कलीन्दी 7- वर्णावत पर्वत 8 – श्रीगकंठ 9- जैलंग पर्वत 10- द्रौपदी का डंडा 11-शिवलिंग,
  
 

पंचाचुली – 
*कुमांऊ हिमालय का सबसे ऊँचा पर्वत है ,इसकी ऊंचाई 6,904 मी० है यह पंच पर्वत चोटी का समूह है  

*पौराणिक ग्रंथो में इसे पंच शिरा नाम से जाना जाता है मान्यता यह है कि


 * पांडव द्वारा हिमालय निवास के समय अन्तिम बार  यहां खाना पकाया गया था 


 * यहां पांडवों ने पांच चूल्हे बनाये अतः यह पंचाचुली के नाम से जाना जाता है

राज्य के अन्य पर्वत जो लघु मध्य शिवालक हिमालय में है

 
* ऊँ पर्वत – पिथौरागढ़
* माउन्ट ऐबट – चम्पावत
* चाईना पीक – नैनीताल
* नागटिब्बा – मसूरी
* लालटिब्बा – मसूरी
* कन्डोली पहाड़ी – पौडी
* इन्द्रकिला पर्वत – उत्तरकाशी
* पिंगनाथ – कौसानी
* खैट पर्वत – टिहरी
* विसोम पर्वत – टिहरी
* चन्द्रकुट पर्वत – टिहरी
* नहान पर्वत – ह्ल्द्वनी
* काषय पर्वत – अल्मोड़ा
* हरिया पर्वत- अल्मोड़ा
*  फलमन्ती पहाड़ी – अल्मोड़ा
* नीलेश्वर – बागेश्वर
* भीलेश्वर – बागेश्वर
* दियोली पर्वत- (कपकोट)बागेश्वर
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