उत्तराखंड की ‘रेड राइस लेडी’ (Red Rice Lady of Uttarakhand)
स्वतंत्री बधानी उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के नौगांव ब्लॉक स्थित कोठियाल गांव की निवासी हैं। उन्होंने अपना जीवन सामाजिक कार्यों के साथ-साथ उत्तराखंड की पारंपरिक कृषि और फसलों के संरक्षण को बचाने के लिए समर्पित किया है। पिछले लगभग 20 वर्षों से सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए वे करीब 15 वर्षों से लाल चावल और श्री अन्न (मिलेट्स) के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए कार्य कर रही हैं।
लाल चावल की पहचान को फिर से दिलाया जीवन
स्वतंत्री बधानी ने पुरोला और नौगांव क्षेत्र में धीरे-धीरे समाप्त हो रही पारंपरिक लाल धान की खेती को पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रयासों के कारण स्थानीय किसानों का रुझान फिर से अपनी पारंपरिक फसलों की ओर बढ़ा।
किसानों को किया संगठित
उन्होंने शुरुआत कुछ सौ किसानों के साथ की थी। आज उनके प्रयासों से—
- 800 से अधिक किसान सीधे तौर पर जुड़े हैं।
- 10,000 से अधिक किसान मिलेट्स या श्री अन्न की खेती से जुड़े बताए जाते हैं।
- किसानों को पारंपरिक खेती, उत्पादन और बाजार से जोड़ने का प्रयास किया गया है।
लोकल से ग्लोबल तक पहुंचा उत्तरकाशी का लाल चावल
स्वतंत्री बधानी के प्रयासों से उत्तरकाशी के पारंपरिक लाल चावल को व्यापक पहचान मिली। यह उत्पाद देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ विदेशों तक भी पहुंचा है। इस पहल को किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाले एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में देखा जाता है।
लाल चावल को मिली GI पहचान
उत्तराखंड के लाल चावल को नवंबर 2023 में भौगोलिक संकेतक (GI Tag) प्राप्त हुआ। GI टैग किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र से जुड़े उत्पाद की विशिष्ट पहचान और उसके पारंपरिक महत्व को कानूनी संरक्षण प्रदान करता है।
क्यों हैं प्रेरणादायक?
स्वतंत्री बधानी का कार्य केवल खेती तक सीमित नहीं है। उन्होंने यह साबित किया है कि यदि स्थानीय परंपराओं, पारंपरिक बीजों और किसानों को सही दिशा एवं बाजार उपलब्ध कराया जाए, तो पहाड़ों की कृषि को रोजगार और आर्थिक विकास का मजबूत आधार बनाया जा सकता है।
एक नजर में:
लाल चावल की संरक्षक
श्री अन्न एवं पारंपरिक खेती की समर्थक
हजारों किसानों को प्रेरित करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता
उत्तराखंड की कृषि विरासत को नई पहचान दिलाने वाली महिला
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