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श्री नीलकंठ महादेव मंदिर, पौड़ी गढ़वाल (उत्तराखंड)

 

यह मान्यता है कि श्री नीलकंठ महादेव मंदिर लगभग 300 वर्ष पूर्व बनाया गया था। इस मंदिर का इतिहास समुद्र मंथन से जुड़ा हुआ है, जब देवताओं और असुरों के बीच अमृत की प्राप्ति के लिए मंथन हुआ था। इसी मंथन से निकले विष को भगवान शिव ने पी लिया था ताकि सृष्टि की रक्षा हो सके। इस विष के प्रभाव से उनका गला नीला पड़ गया, और वे “नीलकंठ” नाम से विख्यात हुए। भगवान शिव के इस महान त्याग का प्रतीक यह मंदिर आज भी उनके अनन्य भक्तों के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल है।

नीलकंठ मंदिर शैली

उत्तराखंड के कुछ मंदिर है जो द्रविड़ शैली में बने है उनमे से एक मंदिर है नीलकंठ मंदिर जी द्रविड़ शैली (दक्षिण भारतीय शैली) में बना हैl द्रविड़ शैली दक्षिण भारत में प्रचलितं थी l 

विशेष 

मंदिर के निकट एक झरना है जहाँ श्रद्धालु दर्शन से पूर्व स्नान करते हैं। यह माना जाता है कि इस जल में स्नान करने से आत्मा शुद्ध होती है और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। नीलकंठ महादेव मंदिर विशेषकर श्रावण मास में, महाशिवरात्रि और अन्य शिवोत्सवों के अवसर पर श्रद्धालुओं की भीड़ से गूंजता रहता है, जहाँ भक्तगण भोलेनाथ के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति अर्पित करते हैं।

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