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उत्तराखंड महक क्रांति नीति 2026–36: सुगंधित खेती से किसानों की आय बढ़ाने की नई पहल

उत्तराखंड सरकार ने पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि को अधिक लाभकारी और रोजगारपरक बनाने के उद्देश्य से “महक क्रांति नीति 2026–36 (Mehak Kranti Policy 2026–36)” लागू की है। यह नीति राज्य में सुगंधित एवं एरोमैटिक (Aromatic) पौधों की खेती को प्रोत्साहित करने की एक दीर्घकालिक पहल है। इसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, बंजर एवं कम उपयोग वाली भूमि का बेहतर उपयोग करना, कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना तथा उत्तराखंड को एरोमा उत्पादों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है।

महक क्रांति नीति का उद्देश्य

महक क्रांति नीति का मुख्य लक्ष्य उत्तराखंड के किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ अधिक लाभ देने वाली सुगंधित फसलों की खेती के लिए प्रेरित करना है। राज्य की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियां लैवेंडर, गुलाब, लेमनग्रास, पुदीना और अन्य औषधीय-सुगंधित पौधों की खेती के लिए अनुकूल मानी जाती हैं। इसी विशेषता का लाभ उठाकर सरकार कृषि को आधुनिक और बाजार आधारित बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।

खेती का विस्तार और किसानों को लाभ

नीति के तहत राज्य में लगभग 22,750 से 23,000 हेक्टेयर भूमि पर सुगंधित पौधों की खेती विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस पहल से करीब 91,000 से 1,00,000 किसानों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलने का अनुमान है। इससे पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे और युवाओं को कृषि आधारित उद्यमों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

राज्य में विकसित की जा रही प्रमुख एरोमा वैली

महक क्रांति नीति के अंतर्गत विभिन्न जिलों की जलवायु और प्राकृतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विशेष एरोमा वैली (Aroma Valley) विकसित की जा रही हैं।

1. दालचीनी एवं तेजपत्ता वैली

  • जिले: नैनीताल एवं चंपावत
  • विशेषता: मसाला एवं सुगंध उद्योग के लिए दालचीनी और तेजपत्ता उत्पादन को बढ़ावा।

2. डैमस्क गुलाब वैली

  • जिले: अल्मोड़ा एवं चमोली
  • विशेषता: उच्च गुणवत्ता वाले डैमस्क गुलाब की खेती, जिससे गुलाब जल, आवश्यक तेल और इत्र तैयार किए जा सकें।

3. तिमरू वैली

  • जिला: पिथौरागढ़
  • विशेषता: स्थानीय औषधीय एवं सुगंधित तिमरू पौधे का संरक्षण और व्यावसायिक उत्पादन।

4. लेमनग्रास एवं मिंट वैली

  • जिले: हरिद्वार एवं पौड़ी गढ़वाल
  • विशेषता: लेमनग्रास और पुदीना आधारित आवश्यक तेल उद्योग को बढ़ावा।

5. मिंट वैली

  • जिला: ऊधम सिंह नगर
  • विशेषता: पुदीना उत्पादन एवं उससे जुड़े प्रसंस्करण उद्योगों का विकास।

किसानों को मिलने वाली सहायता

महक क्रांति नीति के अंतर्गत किसानों को विभिन्न प्रकार की आर्थिक एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

  • सुगंधित फसलों की खेती के लिए 50% से 80% तक अनुदान (सब्सिडी)
  • गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री उपलब्ध कराने की व्यवस्था।
  • पौधशालाओं (Nurseries) के विकास के लिए सहायता।
  • फसल बीमा योजनाओं का लाभ।
  • उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और विपणन में सहयोग।
  • प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन गतिविधियों को प्रोत्साहन।

इन सुविधाओं का उद्देश्य किसानों को केवल खेती तक सीमित न रखकर उन्हें एरोमा उद्योग की पूरी मूल्य श्रृंखला से जोड़ना है।

सैटेलाइट सेंटर की स्थापना

नीति के सफल क्रियान्वयन के लिए राज्य में भाऊवाला (देहरादून) सहित कुल 6 सैटेलाइट सेंटर स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले पौधे, आधुनिक खेती की तकनीक, प्रशिक्षण तथा तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। इससे उत्पादकता और गुणवत्ता दोनों में सुधार की उम्मीद है।

राज्य की अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आधार

सुगंधित पौधों से प्राप्त आवश्यक तेल, इत्र, हर्बल उत्पाद, कॉस्मेटिक्स और औषधीय उत्पादों की देश और विदेश में लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए यह नीति उत्तराखंड के लिए नए आर्थिक अवसर लेकर आ सकती है। यदि स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण इकाइयों और विपणन नेटवर्क का विस्तार होता है, तो किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त होगा।

पर्यावरण और रोजगार दोनों को लाभ

महक क्रांति नीति केवल कृषि विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास से भी जुड़ी हुई है। सुगंधित पौधों की वैज्ञानिक खेती से भूमि का बेहतर उपयोग होगा, जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा तथा महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे।

निष्कर्ष

उत्तराखंड महक क्रांति नीति 2026–36 राज्य में कृषि के आधुनिकीकरण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। एरोमा वैली, उच्च गुणवत्ता वाले पौध, सरकारी अनुदान, प्रशिक्षण और विपणन सहायता जैसी व्यवस्थाएं इस नीति को मजबूत आधार प्रदान करती हैं। यदि इसका प्रभावी क्रियान्वयन किया जाता है, तो उत्तराखंड आने वाले वर्षों में सुगंधित फसलों और आवश्यक तेल उत्पादन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी विशिष्ट पहचान बना सकता है।

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