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पौड़ी गढ़वाल: उत्तराखंड के जनपद का परिचय

 

पौड़ी गढ़वाल यह उत्तराखंड राज्य का एक महत्वपूर्ण जनपद है, जो अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है। मध्यकाल में यहाँ चंद वंश का शांसन रहा था उस समय भी पौड़ी का महत्वपूर्ण स्थान रहा है फिर ब्रिटिश शासन काल में पौड़ी एक जनपद के रूप में गठित किया गया ब्रिटिश काल में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान पौड़ी जनजागृति के केंद्र में से एक था इस बात का पता इस जिस से लगाया जा सकता है कि गूजडू को गढ़वाल का बारदोली  कहा जाता है l 

 

पौड़ी गढ़वाल परिचय: पौड़ी गढ़वाल जिले की स्थापना ब्रिटिश शासन काल के दौरान 1840 ई. में हुई थी। पौड़ी कंडोली की पहाड़ी पर बसा है , यह उत्तराखंड राज्य का एक महत्वपूर्ण जनपद है, जो अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है।

प्रशासनिक व राजनैतिक 1840 ब्रिटिश शासन काल में इसका गठन किया गया पौड़ी में विधान सभा सीटों की संख्या 6 है 1 लैंसडौन, 2-यमकेश्वर, 3-श्रीनगर(अनुसूचितजाति ), 4-कोटद्वार, 5-चौबट्टाखाल, 6-पौड़ी (अनुसूचितजाति),  पौड़ी में तहसीलों की संख्या 12 है  जबकि पौड़ी में विकासखंड ब्लॉक की संख्या 15 है जो राज्य में सबसे ज्यादा है l लोकसभा सीट: पौड़ी गढ़वाल लोकसभा सीट इस जिले के अंतर्गत आती है।

जनसंख्या: 2011 की जनगणना के अनुसार, पौड़ी गढ़वाल की कुल जनसंख्या 687,271 है।

साक्षरता दर: जिले की साक्षरता दर 82.20% है, जिसमें पुरुषों की साक्षरता 92.71% और महिलाओं की साक्षरता 72.60% है।

जनसंख्या घनत्व: पौड़ी गढ़वाल में प्रति वर्ग किलोमीटर 129 लोग निवास करते हैं।

लिंगानुपात: यहां प्रति 1000 पुरुषों पर 1103 महिलाएं हैं, जो राज्य के उच्चतम लिंगानुपातों में से एक है।

 

भौगोलिक स्थिति: पौड़ी का  क्षेत्रफल 5329 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है, पौड़ी पड़ोसी राज्य उत्तरप्रदेश के साथ सीमा बनता है l पौड़ी उत्तराखंड का एक ऐसा जिला है जों  सबसे ज्यादा आपसी सीमा छूता है यह 7 जिलों से आपसी सीमा साझा करता है यह जनपद प्राकृतिक सुंदरता और विविधता से भरपूर है।

नदियां: जिले की प्रमुख नदियां पश्चिम रामगंगा, नयार और अलकनंदा हैं।

पौड़ी प्रमुख पर्वत पौड़ी का सर्वोच्च शिखर झंडीधार है, जिसकी ऊंचाई 2300 मीटर है। पौड़ी कंडोली की पहाड़ी पर बसा है l टिपिन टॉप यह लैंसडौन पौड़ी में है इंदिराकिला पर्वत भी पौड़ी में है l 

राष्ट्रीय उद्यान: सोनानदी राष्ट्रीय उद्यान, जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान और राजाजी राष्ट्रीय उद्यान यहां के प्रमुख वन्यजीव क्षेत्र हैं।

जलविद्युत परियोजनाएं: जिले में रामगंगा परियोजना और चीला परियोजना जैसी प्रमुख जलविद्युत परियोजनाएं संचालित हो रही हैं।

पर्यटक स्थल: पौड़ी गढ़वाल में खिर्स, चीला, कालागढ़, दूधातोली, श्रीनगर, लैंसडाउन और कोटद्वार जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल हैं। गोरखनाथ गुफा भी यहां का प्रमुख आकर्षण है।

श्रीनगर – श्रीनगर अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है श्रीनगर की स्थापना1358 में गढ़वाल नरेश परमार वंश के शासकअजय पाल   द्वारा की गई अजय पाल ने इसको परमार वर्ष की राजधानी बनाया l 1804 से 1814 तकइस क्षेत्र मेंअंग्रेजों का शासन रहा 1815 से 1840 तक श्रीनगर शहर ब्रिटिश गढ़वाल की राजधानी रहा l 

दुगड्डा – कोटद्वार से16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एकछोटा सा शहर है जो लंगूर वह सिलगाड़ के संगम पर स्थित है इसको बसने  का श्रेय धनीराम मिश्र को जाता है यह ब्रिटिश गढ़वाल में एक प्रमुख व्यापारिक एवं राजनीतिक केंद्र रहा था l चंद्रशेखर आजाद ने यहां युवाओं को पिस्टल चलाने का प्रशिक्षण दिया था भवानी दत्त रावत के कहने पर 

कोटद्वार शहर खोहे नदीके तट पर बसा हुआ है कोटद्वार शहर को गढ़वाल का प्रवेश द्वार कहा जाता है पौड़ी गढ़वाल में रेलवे स्टेशन है बॉडी में हीप्रसिद्धआश्रम कड़वा आश्रम स्थित है

कालागढ़ यहां पर रामगंगा नदी पर एक बांध बना हुआ है l 

 

प्रसिद्ध मंदिर: जिले में धार्मिक स्थलों का विशेष महत्व है। ज्वालपा देवी, दुर्गा देवी, सिद्धबली मंदिर, नीलकंठ महादेव, धारीदेवी, चामुंडा देवी, विष्णु मंदिर, और ताड़केश्वर मंदिर प्रमुख धार्मिक स्थल हैं।

प्रसिद्ध मेले: यहां हर साल सिद्धबली जयंती, गेंदा कौथिक, वीरचन्द्र सिंह गढ़वाली मेला, मधुगंगा मेला, बैकुंठ चतुर्दशी मेला, ताड़केश्वर मेला, गंवाडस्यू मेला, कण्वाश्रम मेला और भुवनेश्वरी देवी मेला आयोजित होते हैं।

प्रमुख संस्थान और संगठन:

जिले में एनआईटी श्रीनगर, बीईएल कोटद्वार,

वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली मेडिकल कॉलेज जैसे प्रमुख शिक्षण संस्थान हैं।

यहां उच्च स्थलीय पौध शोध संस्थान, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एन.आई.टी.),

रांसी स्टेडियम, ( पौड़ी ) राज्य का सबसे ऊंचाई पर स्थित स्टेडियम 

हिमालय पुरातत्व एवं नृवंशीय संग्रहालय, ( श्रीनगर )

मोलाराम चित्र संग्रहालय ( श्रीनगर )

गढ़वाल राइफल्स मुख्यालय ( लैंसडौन ) जैसे महत्वपूर्ण संस्थान स्थित हैं।

 

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